पुस्तक निर्माण की प्रक्रिया के दौरान लेखक अकसर भ्रमित हो जाते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि पाठक पुस्तक पढ़ते क्यों हैं। यह सच है कि कोई भी पुस्तक सफलताओं की सीढ़ियां अपनी रचनाओं के बलबूते ही चढ़ती है किंतु यह भी सत्य है कि रचनाओं तक पाठकों को आकर्षित करने के लिए अन्य पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। अन्य पहलुओं में पुस्तक की साज-सज्जा और शीर्षक आते हैं। यदि हम रचनाओं की बात करें तो रचनाओं का स्तर लेखक का व्यक्तित्व और उसका अनुभव निर्धारित करता है किंतु उसकी वर्तनी और व्याकरण संबंधी त्रुटियों के शोधन के लिए विशेषज्ञ अर्थात संपादक की आवश्यकता होती है। विडंबना यह है कि 100 में से 99 लेखक इसकी पूर्ण रूप से उपेक्षा कर देते हैं। वे पुस्तक की साज-सज्जा और मार्केटिंग पर एक अच्छी-खासी राशि खर्च करने से नहीं हिचकिचाते किंतु जब संपादकीय खर्च की बात आती है तो वे इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी खुद ले लेते हैं जिसका परिणाम होता है अशुद्धियों से भरपूर पुस्तक। यह ठीक ऐसे ही है जैसे आपका पसंदीदा भोजन किसी गंदी-सी प्लेट में परोस दिया जाए। अब बात करते हैं अन्य पहलुओं की, जिसमें पुस्तक की साज-सज्जा और शीर्...