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विजय विभोर की लघुकथाएँ

१. कुत्ता कुत्ते
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नन्ही पिंकी को ट्यूशन पर हमेशा दादी जी या मम्मी ही छोड़ने जाती थीं| लेकिन आज दोनों ही घर पर नहीं थीं| ट्यूशन का टाइम हुआ तो पिंकी ने अपना बस्ता उठाया और ट्यूशन के लिए निकल ली| झबरु ने उसे जाता देखा तो दबे पाँव उसके पीछे-पीछे हो लिया| रास्ते में कुछ लालची निगाहों ने देखा कि पिंकी आज अकेली ही चली आ रही है। लेकिन वे नज़रें झबरू को नहीं देख सकी। पिंकी अपनी मस्ती में चल रही थी इसलिए उसको भी पता नहीं चला कि उसके पीछे कौन आ रहा है, कौन नहीं| पिंकी ट्यूशन सैंटर के अंदर पहुँची तो झबरु भी वापिस घर की तरफ हो लिया, क्यूंकि घर पर कोई था नहीं|
ट्यूटर ने आज दस मिनिट पहले ही क्लास खत्म कर दी| पिंकी अपने घर की तरफ निकली तो वे भूखी-लालची निगाहें अपनी दो टाँगों के सहारे उसके पीछे लग गयी। जैसे ही उन्होंने गलत इरादे से पिंकी पर हाथ डालने की कोशिश की तभी दूर से भौंकता/दौड़ता हुआ झबरु उन्हें पिंकी की तरफ आता दिखाई पड़ा। अपने प्रति किसी अनहोनी की आशंका से उस वक्त उन्होंने अपनी जान बचाकर भागने में ही भलाई समझी|



२. तारों की छाँव
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गाँव से दादी जी शहर आयी हुई थीं। शाम को खाना खाने के बाद दादी ने बच्चों से कहा, "चलो बच्चो! छत पर चलते हैं। तारों की छाँव में मैं तुम्हें कहानियाँ सुनाऊँगी। बचपन में तुम्हारे पिताजी को उसकी दादी भी छत पर तारों की छाँव में कहानियाँ सुनाती थी।"
बड़ी मुश्किल से अपने आधुनिक गेजेट्स छोड़कर बच्चे अनमने मन से दादी के साथ बिल्डिंग की छत पर पहुंचे। ऊँची बिल्डिंग की छत तक पहुंचने में दादी की साँसें फूल गयी। दादी आसमान में नज़र दौड़ाते हुए सोचने लगी,
"हे राम! इतनी ऊँची छत से भी शहर के आसमान में तारे नज़र नहीं आ रहे।"



३. जवाब कौन देगा
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मुंशीराम जी का देहांत हो गया। यारे-प्यारे शोकसंतप्त परिवार को सांत्वना देने में लगे हुए थे।
एक पारिवारिक मित्र बोले, "यह सब कैसे हो गया? अभी कुछ दिन पहले तक तो हमारे साथ ताश खेलता था। फिर अचानक....."
"बीमार हो गए थे क्या?" साथ आए एक अन्य व्यक्ति ने पूछा।
"सारी उम्र एक गोली तक नहीं ली थी, लेकिन पिछले सप्ताह बीमार होने पर अस्पताल चैकअप करवाने गए तो डॉक्टर ने कैंसर बात दिया। बस इतना शुक्र है भुगत कर नहीं मरे।" बेटा बोला।
"अब क्या कर सकते हैं भाई। आजकल खाना-पीना तो ढंग का रहा नहीं। अनाज के नाम पर कोरा ज़हर खाने को मिल रहा है।" एक व्यक्ति ने अफ़सोस ज़ाहिर किया।
वहीं पास ही खेल रहे छोटे रिंकू ने उनकी बातें सुनकर प्रश्न किया, "पापा ये अनाज कौन उगाता है?"
सुनते ही शोकसंतप्त लोगों की चर्चा का विषय बदल गया।



४. अपने-अपने कर्तव्य
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"रोहित! ठंड के मौसम में इतनी सुबह-सुबह कहाँ जाने के लिए तैयार हो रहा है?" इंस्पेक्टर शमशेर सिंह ने यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले अपने बेटे से प्रश्न किया।
"पिता जी! डिपार्टमेंट जा रहा हूँ।" रोहित ने सहजता से उत्तर दिया।
रसोई से उसकी माँ अमरावती की आवाज़ आयी, "अरे यूनिवर्सिटी में तो हड़ताल चल रही है,...... तू जाकर क्या करेगा?"
रोहित, "माँ! सब स्टूडेंट्स हॉस्टल फीस में बेतहाशा वृद्धि के विरोध में  स्ट्राइक पर हैं..... और मैं भी तो एक स्टूडेंट ही हूँ।"
शमशेर सिंह ने कड़क आवाज़ में कहा, "तुम जैसे स्टूडेंट को इन फ़िज़ूल चक्करों में नहीं पड़ना चाहिए, अपने कैरियर पर फोकस करो।.... और यदि थोड़ी-सी फीस बढ़ा भी दी तो क्या फर्क पड़ता है?"
रोहित, "फर्क पड़ता है पिता जी! गरीब छात्रों को अपनी पढ़ाई बीच में ही न छोड़नी पड़ जाएगी। उनका और उनके परिजनों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।"
शमशेर सिंह, "अच्छा है, क्लेश कटेगा। हमारे सिर पर नहीं बैठेंगे ये कमी...... "
रोहित हैरत भरी नजरों से देखते हुए, "कौनसी मानसिकता से बात कर रहे हैं पिताजी आप?......"
शमशेर सिंह ने बेटे की बात को काटते हुए कहा, "बेटा! अंदर की ख़बर है, स्ट्राइक तुड़वाने के लिए आज किसी भी समय पुलिस को छात्रों पर बल प्रयोग करना पड़ेगा।"
अमरावती चिंता ज़ाहिर करते हुए, "रोहित बेटा! तू आज मत जा कहीं....."
रोहित माँ की बात काटते हुए, "कोई फर्क नहीं पड़ता माँ! पिता जी अपना कर्तव्य निभाएंगे और मैं आने वाली पीढ़ियों के लिए मैं अपना कर्तव्य निभा रहा हूँ।"
कहते हुए रोहित बाहर की तरफ निकल गया। शमशेर सिंह ने भी अपनी कैप सिर पर सजाई और ड्यूटी पर निकल लिया। किसी अनहोनी की आशंका में अमरावती घर की दहलीज पर खड़ी निहारती रह गयी।




५. लाजवाब
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चिंटू को परेशान-सा देखकर उसकी मम्मी ने कारण पूछा तो चिंटू बोला, "मम्मी! स्कूल में हमारे टीचर पढ़ाते हुए कहते हैं, 'हम भारतवासी बड़े शांतिप्रिय हैं हमने कभी किस दूसरे देश की भूमि का अतिक्रमण नहीं किया, समय-समय पर विदेशी आक्रांताओं ने ही भारत भूमि का अतिक्रमण किया इस पर कब्ज़ा किया।'"
"वह एकदम सही कहते हैं बेटा, हमारे देश ने कभी भी किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया न ही किसी देश की ज़मीन पर कब्ज़ा किया।"
"मम्मी! मुझे तो मेरे टीचर और आप दोनों ही झूठे लगते हैं।" चिंटू ने मुँह बनाते हुए कहा।
"यह क्या कह रहे हो तुम?" मम्मी के स्वर में कड़कपन था।
"ठीक ही तो कह रहा हूँ। विदेशी जमीनों का अतिक्रमण न करने की बात करते हैं, अब अपनी गली में ही देख लो, सभी ने गली में दो-तीन फुट तक रैम्प निकाल रखे हैं। क्या यह भूमि का अतिक्रमण नहीं है? इन रैम्पस के कारण कितनी ही बार आपसी लड़ाइयां हो जाती हैं। क्या यह शांतिप्रिय लोगों के काम हैं? फिर हमारी इतिहास की किताबें भी तो राजाओं की आपसी रंजिशों/खून-खराबे से भरी पड़ी हैं। क्या यह शांतिपूर्ण लोगों का इतिहास है?"

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