सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ख़ुदा का घर

संदीप तोमर




वह मस्जिद गाँव के बाहर स्थित थी। उस मस्जिद का दरवाजा बन्द था। लोग रात आठ बजे की नमाज अदा करके कब के अपने-अपने घरों को जा चुके थे। बाहर तूफान और बारिश जोरो पर थी। तभी किसी ने मस्जिद का दरवाजा खटखटाया।

‘‘कौन है वहाँ?’’ हाथ में लालटेन पकड़े मौलवी ने दरवाजा खोलते हुए पूछा।

‘‘क्या एक रात के लिए यहाँ आश्रय मिलेगा?’’ बाहर सिर से पाँव तक भीगी एक बुरकाधारी महिला ने उम्मीद भरे स्वर में बहुत ही विनम्रता से पूछा।

‘‘नहीं! यह इबादतखाना है, कोई सराय नहीं। वैसे भी यहाँ कोई जनाना नहीं रह सकती।’’ मौलवी ने बहुत ही रूखे स्वर में उत्तर दिया।

‘‘लेकिन इस तूफान और बारिश में मैं कहाँ जाऊँ बाबा?’’ महिला गिड़गिड़ाई।

उसकी बात अनसुनी कर मौलवी पीठ मोड़कर मस्जिद का दरवाजा बन्द करने के लिए पलटा, तो महिला की मायूसी और बढ़ गई।

‘‘बीबीजी! वहाँ सामने कब्रिस्तान है, वहाँ छप्पर के नीचे रात काट लो।’’ पास ही बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े एक बुजुर्ग की आवाज सुनकर जैसे डूबते को तिनके का सहारा मिल गया। जलती हुई आँखों से मौलवी को घूरते हुए वह महिला बुदबुदाई, ‘‘लगता है, खुदा ने अपना घर बदल लिया है!’’

मौलवी ने हिकारत से मस्जिद का दरवाजा खटाक  से बन्द कर दिया था।

टिप्पणियाँ

चर्चित रचनाएँ

 

विजय विभोर की लघुकथाएँ

१. कुत्ता कुत्ते -------------------------- नन्ही पिंकी को ट्यूशन पर हमेशा दादी जी या मम्मी ही छोड़ने जाती थीं| लेकिन आज दोनों ही घर पर नहीं थीं| ट्यूशन का टाइम हुआ तो पिंकी ने अपना बस्ता उठाया और ट्यूशन के लिए निकल ली| झबरु ने उसे जाता देखा तो दबे पाँव उसके पीछे-पीछे हो लिया| रास्ते में कुछ लालची निगाहों ने देखा कि पिंकी आज अकेली ही चली आ रही है। लेकिन वे नज़रें झबरू को नहीं देख सकी। पिंकी अपनी मस्ती में चल रही थी इसलिए उसको भी पता नहीं चला कि उसके पीछे कौन आ रहा है, कौन नहीं| पिंकी ट्यूशन सैंटर के अंदर पहुँची तो झबरु भी वापिस घर की तरफ हो लिया, क्यूंकि घर पर कोई था नहीं| ट्यूटर ने आज दस मिनिट पहले ही क्लास खत्म कर दी| पिंकी अपने घर की तरफ निकली तो वे भूखी-लालची निगाहें अपनी दो टाँगों के सहारे उसके पीछे लग गयी। जैसे ही उन्होंने गलत इरादे से पिंकी पर हाथ डालने की कोशिश की तभी दूर से भौंकता/दौड़ता हुआ झबरु उन्हें पिंकी की तरफ आता दिखाई पड़ा। अपने प्रति किसी अनहोनी की आशंका से उस वक्त उन्होंने अपनी जान बचाकर भागने में ही भलाई समझी| २. तारों की छाँव ------------------...