ललित कुमार मिश्र
लड़ियों और दीयों से ज्यादा जगमगाती है
जब किसी के चेहरे पर मुस्कान आती है
तो इस बार भी दीवाली क्या यूँ ही मनाओगे
बताओ न! कितने चेहरों पर मुस्कान लाओगे?
पटाखों से ज्यादा रोमांचित करता है
जब किसी की आँखों में सपना पलता है
तो इस बार भी दीवाली में शोर ही मचाओगे
बताओ न! कितनों को उत्साहित कर पाओगे?
ये दीये, पटाखे बस कुछ दिन चलेंगे
फिर ये अगले साल ही मिलेंगे
तो इस बार भी दीवाली कुछ दिन ही मनाओगे
बताओ न! कितने घर रोशन कर पाओगे?
लड़ियों और दीयों से ज्यादा जगमगाती है
जब किसी के चेहरे पर मुस्कान आती है
तो इस बार भी दीवाली क्या यूँ ही मनाओगे
बताओ न! कितने चेहरों पर मुस्कान लाओगे?
पटाखों से ज्यादा रोमांचित करता है
जब किसी की आँखों में सपना पलता है
तो इस बार भी दीवाली में शोर ही मचाओगे
बताओ न! कितनों को उत्साहित कर पाओगे?
ये दीये, पटाखे बस कुछ दिन चलेंगे
फिर ये अगले साल ही मिलेंगे
तो इस बार भी दीवाली कुछ दिन ही मनाओगे
बताओ न! कितने घर रोशन कर पाओगे?
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