राजकमल चौधरी
बीस हज़ार लोगों की एक बस्ती है। इस बस्ती में एक घर है जहाँ एक ननद और एक भौजाई रहती है। दोनों विधवा। कोई बाल-बच्चा नहीं। कोई पुरुष नहीं। दोनों देह व्यापार करके जीवन-यापन करती हैं। उन दोनों का मानना है कि बीस हज़ार की बस्ती में दो सौ बंटे तो होंगे ही - जो उनके लिये पर्याप्त हैं।
एक दिन भाभी ननद से पूछती है कि कहाँ गयी थी तो ननद जवाब देती है कि किसी बंटे के पास गयी थी। पाँच रूपये मांगे थे लेकिन बंटे ने तीन रुपये शाम तक देने का वायदा कर दो रुपये चोली में ठूंसे। फिर बंटा उसे खेतों की तरफ़ ले गया। दोनों गुत्थम-गुत्था थे कि एक पुलिस का सिपाही आ गया। सिपाही को देखकर बंटा भगा। ननद तड़पती रही। सिपाही चला गया।
इतने में ननद ने सुना कि उसे कोई पुकार रहा है। वह भागकर गयी तो देखा बंटा तड़प रहा है और उसे पुकार रहा है। ननद ख़ुद कामातुर थी और उसे लगा बंटा भी कामातुर होकर तड़प रहा है। ननद जाकर उसको थामती है और उसके साथ सम्भोग करने लगती है।
काम का ज्वार उतरता है तो देखती है कि बंटे का शरीर नीला पड़ चुका है और बंटा उसकी बाहों में ही मर जाता है। दरअसल बंटे को सांप ने काट लिया था और वह उसे बचाने के लिये पुकार रहा था।
एक दिन भाभी ननद से पूछती है कि कहाँ गयी थी तो ननद जवाब देती है कि किसी बंटे के पास गयी थी। पाँच रूपये मांगे थे लेकिन बंटे ने तीन रुपये शाम तक देने का वायदा कर दो रुपये चोली में ठूंसे। फिर बंटा उसे खेतों की तरफ़ ले गया। दोनों गुत्थम-गुत्था थे कि एक पुलिस का सिपाही आ गया। सिपाही को देखकर बंटा भगा। ननद तड़पती रही। सिपाही चला गया।
इतने में ननद ने सुना कि उसे कोई पुकार रहा है। वह भागकर गयी तो देखा बंटा तड़प रहा है और उसे पुकार रहा है। ननद ख़ुद कामातुर थी और उसे लगा बंटा भी कामातुर होकर तड़प रहा है। ननद जाकर उसको थामती है और उसके साथ सम्भोग करने लगती है।
काम का ज्वार उतरता है तो देखती है कि बंटे का शरीर नीला पड़ चुका है और बंटा उसकी बाहों में ही मर जाता है। दरअसल बंटे को सांप ने काट लिया था और वह उसे बचाने के लिये पुकार रहा था।
भाभी ने ननद से कहा - तो क्या हुआ। ननद कहती है उसे नींद नहीं आती है और बंटे का मृत शरीर मुझसे लिपटा हुआ है, ऐसा लगता है।
इस पर भाभी कहती है - अरे छोड़ कुछ नहीं हुआ। जा पोखर से नहाकर आ और गंगाजल छिड़क कर पवित्र हो जा। यह तो एक मामूली बात है।
इस पर भाभी कहती है - अरे छोड़ कुछ नहीं हुआ। जा पोखर से नहाकर आ और गंगाजल छिड़क कर पवित्र हो जा। यह तो एक मामूली बात है।
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