(1) चयन
बलात्कार पर बात करने के लिए
हम बलात्कार की ताजा ख़बर का इंतजार करते हैं
जब कोई बेटी सो जाती हैं
तब देश जागता हैं
हमें इतिहास में पद्मावती को पढ़ाया हैं
पद्मावती के जौहर को पढ़ाया जाता हैं
हम नहीं सोचते
पद्मावती के पास इतना समय तो था
कि वो जौहर कर सकी
पर साधारण स्त्री के पास तो इतना भी समय नहीं होता...
हम नहीं सोचते कि एक औरत खुद को आग में झोंक देने को तैयार हैं
पर आदमी की मानसिकता
वो औरत को छोड़ना ही नहीं चाहता
हम स्त्री की अस्मत को शरीर से जोड़ लेते हैं और अस्मत को स्त्री के स्वाभिमान से
जो सही भी हैं
लेकिन क्या अस्मत लूट ली जाने वाली चीज़ हैं???
मैं सोचती हुँ कि
यदि ऐसा शण आ जाए
तो औरत को क्या होना चाहिए???
पद्मावती या फूलन देवी...!
मैं सोचती हूँ कि ऐसे शण में
औरत को पद्मावती होना चाहिए क्योंकि
वो सिर्फ शरीर नहीं नोंचते
वो रूह तक को नोच देते हैं....
पर एक साधारण स्त्री के पास तो इतना भी समय नहीं होता...
कि वो जौहर कर सके !!!
(2) समझदार लड़कियाँ
प्रेम में पड़ जाती हैं
अक्सर समझदार लड़कियाँ
वही समझदार लड़कियाँ
जो आती हैं
अव्वल अपनी कक्षा में...
प्रेम में पड़ी समझदार लड़कियाँ
जानती हैं अपनी मर्यादाएं
ओर मर्यादाओं में रहकर ही माँगती हैं अपना प्रेम
जीवन भर का मेल
मगर ये समाज सिर्फ़ कहानियों में पसन्द करता हैं
नायक नायिकाओं का संगम
हकीकत में ये सबकुछ बताता हैं
मूर्खता...
ये बिना प्रेम वाले विवाह में झोंकता हैं
और प्रेम विवाह करने वालों को रोकता हैं
पर प्रेम में पड़ी समझदार लड़कियाँ
जान जाती हैं
सही गलत में अंतर
वो नहीं स्वीकारती अन्याय
वो लड़ जाती हैं
भिड़ जाती हैं
कर लेती हैं
बगावत
क्योंकि वो
हो जाती हैं
बेझिझक ,बेख़ौफ़ ,बेपरवाह
प्रेम में पड़ी समझदार लड़कियाँ ।
(3) कर्तव्य और अधिकार
स्त्री और पुरुष को
विवाह मे
फेरे लेते समय
मिलते हैं कुछ कर्त्तव्य ओर कुछ अधिकार
पर कहाँ याद रहते हैं
पुरूष को कर्त्तव्य
वो बस मान लेता हैं
उसके साथ ब्याही गईं
स्त्री पर एकाधिकार !
(4) स्त्री तेरी कहानी
उसकी आबरु को यहाँ छीन लिया जाता हैं,
जिस देश मे''बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ" का नारा दिया जाता हैं,
हर छोटे मसले पर यहाँ
बड़े फैसले होते हैं,
बस अहम बात को दबा दिया जाता हैं,
रौंद देते हो मासूमियत को पैरों तेले,
तुम्हारे अंदर का इंसान क्या मर जाता हैं,
जब आती हैं बात इंसाफ़ की,
मेरे देश का कानून किधर जाता हैं,
सीता हो,
द्रोपदी हो,
या हो निर्भया, आसिफा
क्यों,हर लड़ाई में
स्त्री के अस्तित्व को नोच दिया जाता हैं,
रहते हैं सिर्फ़ भक्षक यहाँ,
जिस धरती को देवताओं की जन्मभूमि कहा जाता हैं ।
(5) हैवानियत
हैं आदमी जात की हैवानियत ऐसी
अगर औरत को मारने का मक़सद हो
तो
पहले वोे नोंचना चाहेंगे !
बलात्कार पर बात करने के लिए
हम बलात्कार की ताजा ख़बर का इंतजार करते हैं
जब कोई बेटी सो जाती हैं
तब देश जागता हैं
हमें इतिहास में पद्मावती को पढ़ाया हैं
पद्मावती के जौहर को पढ़ाया जाता हैं
हम नहीं सोचते
पद्मावती के पास इतना समय तो था
कि वो जौहर कर सकी
पर साधारण स्त्री के पास तो इतना भी समय नहीं होता...
हम नहीं सोचते कि एक औरत खुद को आग में झोंक देने को तैयार हैं
पर आदमी की मानसिकता
वो औरत को छोड़ना ही नहीं चाहता
हम स्त्री की अस्मत को शरीर से जोड़ लेते हैं और अस्मत को स्त्री के स्वाभिमान से
जो सही भी हैं
लेकिन क्या अस्मत लूट ली जाने वाली चीज़ हैं???
मैं सोचती हुँ कि
यदि ऐसा शण आ जाए
तो औरत को क्या होना चाहिए???
पद्मावती या फूलन देवी...!
मैं सोचती हूँ कि ऐसे शण में
औरत को पद्मावती होना चाहिए क्योंकि
वो सिर्फ शरीर नहीं नोंचते
वो रूह तक को नोच देते हैं....
पर एक साधारण स्त्री के पास तो इतना भी समय नहीं होता...
कि वो जौहर कर सके !!!
(2) समझदार लड़कियाँ
प्रेम में पड़ जाती हैं
अक्सर समझदार लड़कियाँ
वही समझदार लड़कियाँ
जो आती हैं
अव्वल अपनी कक्षा में...
प्रेम में पड़ी समझदार लड़कियाँ
जानती हैं अपनी मर्यादाएं
ओर मर्यादाओं में रहकर ही माँगती हैं अपना प्रेम
जीवन भर का मेल
मगर ये समाज सिर्फ़ कहानियों में पसन्द करता हैं
नायक नायिकाओं का संगम
हकीकत में ये सबकुछ बताता हैं
मूर्खता...
ये बिना प्रेम वाले विवाह में झोंकता हैं
और प्रेम विवाह करने वालों को रोकता हैं
पर प्रेम में पड़ी समझदार लड़कियाँ
जान जाती हैं
सही गलत में अंतर
वो नहीं स्वीकारती अन्याय
वो लड़ जाती हैं
भिड़ जाती हैं
कर लेती हैं
बगावत
क्योंकि वो
हो जाती हैं
बेझिझक ,बेख़ौफ़ ,बेपरवाह
प्रेम में पड़ी समझदार लड़कियाँ ।
(3) कर्तव्य और अधिकार
स्त्री और पुरुष को
विवाह मे
फेरे लेते समय
मिलते हैं कुछ कर्त्तव्य ओर कुछ अधिकार
पर कहाँ याद रहते हैं
पुरूष को कर्त्तव्य
वो बस मान लेता हैं
उसके साथ ब्याही गईं
स्त्री पर एकाधिकार !
(4) स्त्री तेरी कहानी
उसकी आबरु को यहाँ छीन लिया जाता हैं,
जिस देश मे''बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ" का नारा दिया जाता हैं,
हर छोटे मसले पर यहाँ
बड़े फैसले होते हैं,
बस अहम बात को दबा दिया जाता हैं,
रौंद देते हो मासूमियत को पैरों तेले,
तुम्हारे अंदर का इंसान क्या मर जाता हैं,
जब आती हैं बात इंसाफ़ की,
मेरे देश का कानून किधर जाता हैं,
सीता हो,
द्रोपदी हो,
या हो निर्भया, आसिफा
क्यों,हर लड़ाई में
स्त्री के अस्तित्व को नोच दिया जाता हैं,
रहते हैं सिर्फ़ भक्षक यहाँ,
जिस धरती को देवताओं की जन्मभूमि कहा जाता हैं ।
(5) हैवानियत
हैं आदमी जात की हैवानियत ऐसी
अगर औरत को मारने का मक़सद हो
तो
पहले वोे नोंचना चाहेंगे !
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