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भावना ठाकर की कहानी

कश्मकश ज़िंदगी की


क्यूँ कभी-कभी लगता है ज़िंदगी खूबसूरत भी है ओर नासूर भी पता नहीं क्यूँ मैं इतनी अनमनी सी रहती हूँ सबकुछ तो है फिर भी एक कमी सी कचोटती है, वैसे भूल जाना चाहिए मुझे बीते कल को हथेलियों पर लिए फिरती हूँ, पर क्या पहले प्यार को भूल जाना इतना आसान होता है दिल में एक ही रंजिश पलती है सालों से एक सवाल लिए वो क्यूँ नहीं आया।

काश कहीं वो एक बार मिल जाए तो पूछ लूँ उसे जो आज मेरी इस उखड़ी- उखड़ी सोच का ज़िम्मेदार है, मेरे खयालों की रफ़्तार को तोड़ती कुणाल की आवाज़ ने चौंका दिया रिया आज रात नये बोस की ज्वाईनिंग की खुशी में होटेल होलीडे इन में पार्टी है, ओर हाँ तुम्हें वो रेड साड़ी पहनकर आना है, आज पहली बार ऑफ़िशियल पार्टी में सबको विद फैमिली बुलाया है.! 
तुम देखना बंदे की मल्लिका को देखकर जलन होगी आज मेरे सारे कलिगस को, पर मैंने टालने की कोशिश में कुणाल से कहा प्लीज़ हो सके तो तुम अकेले चले जाओ मुझे बख़्श दो मैं आदी नहीं एसी पार्टीस की.!
एसी पार्टीयों में लेड़ीज़ की फ़ालतू की फ़ेशन कंपिटीशन होती है, एक दूसरे से स्मार्ट दिखने की बचकानी हरकतें, ओर तुम जेन्टस लोगों की बोस की नज़रों में खुद को ओवर स्मार्ट साबित करने की कोशिश रहती है, ओर पीना पिलाना ओर बहकना ये सब मेरी सोच का हिस्सा नहीं, पर कुणाल के आगे मेरी कोई दलील कहाँ टिकती बस मुँह फुलाकर ऑर्डर देना ओर मेरा विथ स्माईली फ़ेस उसे फौलो करना मेरी ज़िंदगी का मायना है.!
मेरा पति कुणाल गजब का हेंडशम है 6 फूट हाईट, गोरा रंग, नीलम सी आँखे,ओर घुँघराले बाल किसी भी लड़की को अट्रेक्ट करने के सारे गुणों की खान समझो।
कोर्पोरेट जगत में बड़ी कंपनी के मैनेजर कुणाल मेहता की मैं पत्नी हूँ बस एक कमी ख़लती है "बताऊँगी कभी कौन सी कमी" 
रात के 8:00 बजे कुनाल की पसंद की रेड साड़ी ओर रियल पर्ल के लाइट ओर्नामेन्टस पहन कर मैं निकली, खुले बाल ओर हल्की लिपस्टिक लगाकर निकली तो कुणाल का मुँह खुला रह गया, मैडम किसीका कत्ल करनेका इरादा है क्या ? कुछ तो रहम करो आज तो बिजली गिरने वाली है पूरे स्टाफ पर।
मेरा पागल बुद्धु कुणाल गाल पर पप्पी लेते जानलेवा अंदाज़ में कुछ अटपटी शायरी भी कर लेता है।
मुझे याद है मैं कैसी बिगडी हुई लड़की थी मेरी बियर छुड़वा दी, नानवेज भी, ओर सुबह 10 बजे तक सोना कुणाल ने हर बुरी आदत से निजात दिला दी थी,
कुणाल मेरी हर बात बोलने से पहले समझ लेता है। 
रात के 8:30 बजे मेरी दुनिया कुछ ओर थी कुणाल के साथ गाड़ी में बाजू की सीट पर बैठते ही कुणाल ने रेडियो मिर्ची स्टार्ट कर दी ओर गाना चला 'मेरे दिल में आज क्या है तू कहे तो मैं बता दूँ' ओर 8 साल पुराना वो ज़माना याद दिला दिया मेरे पीछे पागल एक दीवाने लड़के ने मेरे लिए गाया था काॅलेज के एन्यूअल फंक्शन में, विकास खन्ना जिसे मैं भी पागलों की तरह चाहती थी पता नहीं आज कहाँ होगा, बस अतीत की यादों ने घेर लिया ओर कब होटल आ गई पता ही नहीं चला।
लोगों की भीड़भाड़ म्यूजिक सिस्टम का शोर, एक से बढ़कर एक फैशन का मेला हर क्षेत्र के महारथी मौजूद थे यहाँ, करंट टापिक की चर्चा, कोकटेल की सुगंध ओर बाहर लोन में देसी से लेकर कोन्टिनेन्टल खाने से सजे टेबल, पूरे शबाब पर थी पार्टी हमारे एन्टर होते ही मुझे देखकर लेड़ीज़ में गपसप होने लगी, ओर सारे मेल मेम्बर्स की आँखें मेरे उपर कुछ यूँ ठहर गई मानों आँखों से मुझे पी रहे हो।
मैंने कुणाल के कानों में फ़ुसफ़ुसाते कहा मैंने कहा था ना तुम अकेले हो आओ, ना मैं यहाँ किसीको जानती हूँ ना इस माहौल की आदी हूँ.!
पार्टी का गर्म माहौल मेरे ठंडेपन को कचोट रहा था मैं बाहर गार्डन में खुली साँसे भरने मेरा फ़ेवरिट स्ट्रॉबेरी मिल्क शैक का ग्लास लेकर आ गई, पर वो गाना मेरा पीछा कर रहा था पलकों पर ठहरे आँसू आइलाइनर खराब कर दे उसके पहले पी लिए,
मैं कुछ आगे सोचती की पीछे से कुणाल की आवाज़ आई सर कम हियर मीट माय वाइफ रिया,रिया ये है हमारे नये बोस, जैसे ही मैं मूड़ी विकास खन्ना को सामने पाया।
आँखों में असंख्य सवाल लिए मैंने हाथ मिलाया ओर एक सिहरन दौड़ गई रोम- रोम जल उठा उस पहचाने स्पर्श की आग आज भी धगधगते लावा सी मौजूद थी उसके हाथ में, गुप्ता जी के बुलाने पर कुणाल हम दोनों को अकेला छोड़कर गुप्ताजी की टोली में बैठ गया पूरे 8 साल बाद हम रुबरु हुए थे इससे पहले कि हमारी मुलाकात का वक्त खत्म हो जाए मैंने सीधा पूछ लिया तुम क्यूँ नहीं आए उस दिन ?  मैं उस दिन शाम से लेकर रात तक बैठी रही।
तुम्हारे इंतज़ार में आँखें सूख गई रेल्वे स्टेशन की बेंच पर बैठे बार-बार सीढ़ीयों से चढ़ते उतरते लोगों के चेहरों में तुम्हें ढूँढती रही शाम के 6 बजे से लेकर रात के 12 बजे तक पूरे 6 घंटे तड़पती रही ठंड में ठिठुरती दिल में एक आस लिए सब ख़ामोश ओर विरान होता रहा, चने वाला, झाडू वाला, कुल्हड़ की  चाय वाला, कुली ओर टी टी तक चले गए, सब सो गए, एक मैं ओर आधी नींद में मेरी ही तरहा अपनी-अपनी ट्रेन के इंतज़ार में बैठे बोझिल लम्हें काट रहे कुछ मुसाफ़िर बचे थे।
मैम डु यू वोन्ट शम स्टार्टर वेइटर ने मुझे मेरी तंद्रा से जगाया, मैं तो मन ही मन खुद के साथ ही सवाल जवाब किए जा रही थी, बस इतने ही शब्दों में साँसे भर पाई की कहो ना उस दिन तुम क्यूँ नहीं आए ?
विकास ने मुझसे आँखें चुराते इतना ही पूछा कैसी हो तुम, मैंने अपना सवाल द्रढता से दोहराया जो सवाल मेरे हलक में सालों से अटका था आख़िर क्या मजबूरी थी की सात जन्मों तक साथ निभाने की कस्मों का गला घोंट कर तुम बेवफा बन गए।
विकास ने कहा तुम आज भी उस मोड़ पर खड़ी हो? प्लीज़ आगे बढ़ो मुट्ठी खोल दो ओर बह जाने दो उन लम्हों को जो तुम्हें इतनी तकलीफ़ देते है कुछ हासिल नहीं होता कुछ सवालों के जवाब ढूँढने से भी नहीं मिलते। 
तुम्हारे हसबैंड बहुत अच्छे है ओर यस हेंडशम भी ओर तुम्हें बहुत चाहते है दिख रहा है उनकी आँखों में ख़ुशनसीब हो।
मैंने विकास की बात काटते कहा "पर मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ उसका क्या" विकास बोला पगली तुम मुझे प्यार करती थी आज तुम सिर्फ़ मेरे ख़याल से प्यार करती हो, मेरा कोई वजूद नहीं कोई जगह नहीं तुम्हारी लाइफ में अब मैं आरती का पति हूँ.! तुम्हारे साथ जो था वो अतीत का हिस्सा मैं बहुत पीछे छोड़ आया हूँ आज मैं एक होटल के पूल साइड एरिया में अपनी कंपनी के मैनेजर की वाइफ़ के साथ खड़ा हूँ.!
तभी म्यूजिक सिस्टम पर गज़ल का ट्रेक बदला पंकज उधास की आवाज़ में "मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हभ"
ये गज़ल हम दोनों की फ़ेवरिट थी बहुत बार साथ में गुनगुनाते थे, याद है तुम्हें? 
पर आज वही शख़्स सामने खड़ा था फिर भी अजनबी सा बनकर बोला मुझे याद नहीं यार, उन बीते लम्हों को भूलकर क्या-क्या समझा रहा था।
ओर बोला हाँ रिया तुम्हारे साथ तब जो था बड़ी शिद्दत वाला था जहन के एक कोने में खूबसूरत यादों के साथ वो लम्हें भी संजोकर रखे है, तुम्हारी तरह हथेलियों पर रखता तो शायद जी नहीं पाता क्यूँकी एसे लम्हें दु:ख ओर तकलीफ़ ही देते है, तुम भी बह जाने दो वो लम्हें जो कभी हमने साथ बिताये थे।
दूर से कुणाल हाथ में ड्रिंक लिए हमारी तरफ़ आ रहा था मेरा मन चाह रहा था वो कहीं ओर मूड़ जाए, उसे कोई ओर रोक ले,मैं आज विकास से सारे सवालों के जवाब मांगना चाहती थी, पर मेरा चाहा आज तक कभी कुछ भी तो नहीं हुआ.!
वो आते ही बोला क्या बात है आप दोनों को एक दूसरे की कंपनी पसंद आ गई या पहले से एक दूसरे को जानते हो क्यूँकी मेरी ये खूबसूरत बीवी इतनी देर तक सिवाय मेरे किसीको बरदास्त ही नहीं कर पाती।
विकास ने कहा अरे एसा कुछ नहीं आपकी बीवी मुझे कोई ओर समझ रही थी ओर इतना बोलकर विकास अपनी बीवी के पास चला गया.!
रात के 10:30 बज चुके थे और मेरी दुनिया में ख़लबली मची थी विकास जो कभी मेरा था मुझे बेइन्तहा बेशुमार चाहता था आज किसी ओर की किस्मत का सरताज था, किसी ओर की बाँहों में बाँहे डाले डांस फ्लोर पे डांस कर रहा था, जिसकी मेरे साथ कोई कंपेरिज़न नहीं थी ना शक्ल थी, ना स्मार्ट नेस, ना फ़ेशन की नाॅलेज, ना सुंदरता जिसे विकास ने मेरे प्रेम का गला घोंट कर मेरे बदले चुना था। 
जो विकास मुझे अपनी जान कहता था, मेरे साथ घंटो बिताता था, मेरी हर बात की परवाह करता था, मेरी पसंद के कपड़े जूते ओर बाइक तक मेरी पसंद की लेता था, मूवी मौल रैस्टोरेंट पूणे शहर का कोना-कोना हमारे प्यार का गवाह था जिस विकास की आँखों की, बालों की, चाल की, उसकी हर एक अदा की मैं दीवानी थी मैं उसकी आँखों में अपनी दुनिया देखती थी ये वही विकास है जिसने एक दिन मेरा हाथ पकड़कर कहा था कहो रिया क्या तुम मेरे साथ भाग कर शादी करोगी ? अगर हाँ तो आज रात मैं रेल्वे स्टेशन पर तुम्हारा इंतज़ार करूँगा 
पर मेरा इंतज़ार आज 8 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ वो क्यूँ नहीं समझता।
मैं जानती हूँ आज भी वो बेइन्तहा शिद्दत वाला प्यार मुझसे करता है जताता नहीं पर जितना मेरा दिल ओर आँखें उसे पहचानते है उतना वो खुद भी नहीं जानता.!
आज भी अहसास को बातों की परतों में  लपेट कर चला गया, रही होगी कोई मजबूरी वरना विकास की पसंद आरती जैसी तो ना थी, एक बँधन में बँधकर भी अहसासों पर काबू पाना मुझसे बेहतर कौन जानता होगा पर क्या मजबूरी हो सकती है क्यूँ छुपा रहा है विकास अपनी भावनाएँ नज़रों के खेल के पीछे.!  
मेरी सोच को लगाम देते स्टेज पर से एक एनाउंसमेंट हुई,
Ladies n gentlemen आज हम एक गेम खेलते है, हमने सबके नाम की चिठ्ठी बनाई है बारी-बारी सब एक चिट्ठी उठाएँगे ओर चिठ्ठी में जिसका नाम निकले उससे चिठ्ठी उठाने वाले को एक सवाल पूछना होगा ओर जिसका नाम चिठ्ठी में हो उसे सवाल का सही जवाब देना है। 
जिस दिन रेल्वे स्टेशन से रोती हुई तकदीर को कोसते लौटी थी उस दिन से सबसे भरोसा उठ गया था,हाँ हो गई थी 
मैं नास्तिक,पर आज भगवान से प्रार्थना करने लगी की विकास के नाम की चिठ्ठी मेरे नसीब में लिख दे,बारी-बारी सबका टर्न पूरा हो गया आख़री दो चिठ्ठी बची थी मेरा नं. आ गया, मैंने काँपते हाथों से चिठ्ठी उठाई ओर खोलते ही एक यकीन का भाव जग गया मन में ओर मैंने नज़रें उठाकर उपर वाले का शुक्रिया अदा किया विकास का नाम चिठ्ठी पर पढ़कर कुणाल बोला बीवी कुछ एसा पूछ लो की विकास जी की बोलती बंद हो जाए.! 
मैंने विकास की ओर देखा मैंने सोचा था नर्वस होगा पर उसके चेहरे पर एक कान्फ़िडेन्स दिखा, मैंने हल्के लहजे में सालों से मन में पड़ा सवाल पूछा, बताईये विकास जी क्या आपने अपनी लाइफ़ मैं कभी किसीसे सच्चा प्यार किया है ? ओर करके छोड़ दिया है?
विकास कुछ देर टकटकी लगाए मुझे देखता रहा मैंने महसूस किया उसकी आँखों में कुछ पिघलता पलकें नम ओर एक दर्द भरी शिकन को पल भर में पी गया, ओर मेरी तरफ़ देखकर भारी आवाज़ में एक आत्मविश्वास के साथ बोला मिसेज़ मेहता नो, नेवर मैंने कभी किसीसे प्यार नहीं किया ना ही प्यार करके किसीको छोड़ा, मैंने सिर्फ़ ओर सिर्फ़ अपनी पत्नी से प्यार किया है,
उसके शब्दों ने एक वज्रघात किया मेरे वजूद पर मैंने मूड़कर देखना भी मुनासिब नहीं समझा ओर कुणाल को हाथ से खिंचती चलो अब घर चले कहती निकल गई उस फ़रेबी इंसान से दूर, अपने प्यारे कुणाल की हसीन दुनिया में जो मुझे अपनी जान से ज्यादा चाहता है।
गुस्से में गाड़ी का दरवाज़ा धड़ाम से बंद करके आँखें बंद करके बैठे गई, कुणाल ने सिर्फ़ इतना पूछा आर यू ओके ? मैंने हाँ में सर हिलाया कुणाल के सामने चिल्ला-चिल्ला कर रो नहीं सकती थी बस खामोशी से एक ज़लज़ले को पिती रही.!
कुछ देर बाद ख़ामोशी को तोडते कुणाल ने कहा रिया प्लीज़ डोन्ट बी अपसेट मैं जानता हूँ की तुम ओर विकास एक दूसरे को पहले से जानते हो ओर एक दूसरे को बेइन्तहा चाहते हो, ओर तुम यकीन नहीं करोगी पर ये बात मुझे खुद विकास ने ही बताई थी.! 
मैं आघात ओर आश्चर्य से कुणाल को देखती रही how is this possible कैसे I can't believe ?
कुनाल ने कहा हमारी शादी पक्की होने के बाद जब-जब मैं तुमसे मिलता था तुम कभी मानसिक तौर पर मेरे साथ नहीं होती थी, हंमेशा एक उलझन में घिरी मानों ख़ुद से ही ख़फ़ा सी तब मैंने सोचा हो न हो तुम हमारे रिश्ते से खुश नहीं हो ओर इससे पहले की हमारा रिश्ता तुम्हारे अपनेपन में जबरदस्ती बँधे मैंने तय किया पहले सच्चाई जान लूँ उसके बाद ही शादी करूँगा.!
ओर जो तुम्हारे सबसे करीब तुम्हारी दोस्त है ना शालिनी उससे पूछा, पहले तो उसने कुछ भी बताने से इन्कार कर दिया पर मैंने जब उसे भरोसा दिलाया की मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ ओर जो कुछ सच्चाई होगी वो जानने के बाद भी तुम्हारे प्रति वही फ़ीलिंग रहेगी तब जाके उसने मुझे तुम्हारे ओर विकास के रिश्ते के बारे में बताया, फिर मैं विकास से भी मिला उसने जो बताया उसके बाद विकास के लिए मेरी इज्जत बढ़ गई, उसने मुझसे वादा लिया की मैं तुम्हें हंमेशा खुश रखूँगा, दु:ख दर्द कभी तुम्हें छू भी ना पाए, हाँ मैंने भी पूछा उसकी मजबूरी के बारे में पर शायद वो खुद अकेले झेलना चाहता है उस दर्द को तो नहीं बताया, पर वो आज भी तुम्हें पागलों की तरह चाहता है ये हकिकत है ओर मानता हूँ आज तुम्हें सारे सवालों के जवाब मिल गए होंगे।
मैं आँखें बंद किए बैठी रही मैं शर्मसार थी कुणाल के साथ अन्याय करती आ रही थी 8 सालों से जिस इंसान ने मेरे बारे में सबकुछ जानते हुए भी मुझे इतना प्यार दिया ओर कभी जताया तक नहीं, ना भनक होने दी की वो सब जानता है, ना कभी कोई ताना कसा, कई बार अंतरंग क्षणों में मैं कुणाल को भूलकर विकास के खयालों में खो जाती थी ओर कुणाल का उन्माद ठंडा हो जाता था मेरे बर्ताव से, पर it's ok कहते हुए संभाल लेता था हम दोनों को क्यूँ आख़िर एक बेवफा की ख़ातिर कुनाल के साथ अन्याय करती रही उसे सज़ा देती रही मैंने कुणाल का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा सौरी.!
कुणाल ने मेरा गाल थपथपाते कहा मेरी पगली forget all I m always with u तभी  कुणाल के मोबाइल पर एक मेसेज झिलमिलया कुणाल रिया को संभाल लेना आज वो बहुत अपसेट होगी मेरे दिल में जलन हो रही है ये उसी के दिल में लगी आग की है।
कुणाल ने मुझे वो मेसेज दिखाया ओर हंस पड़ा साला मेरी बीवी के दिल का हाल मुझसे पहले जान जाता है,ओर बीवी सुनो होता है सबका एक पास्ट यार अब वर्तमान में लौट आओ। 
गाड़ी एक ब्रिज के उपर से गुजर रही थी नीचे एक नदी बह रही थी मैंने कुणाल को गाड़ी साइड में खड़ी करने के लिए बोला कुणाल ने गाड़ी रोक दी 
मेरे गले में एक लॉकेट था उसमें मेरी ओर कुणाल की तस्वीर है ओर कुनाल की तस्वीर के पीछे विकास की तस्वीर थी मैंने वो निकालकर टुकड़े-टुकड़े  करके नदी में बहा दिए ओर एक पीड़ादायक अध्याय को अग्नि दाह करके लौट आई हंमेशा-हंमेशा के लिए ज़िंदगी की सच्चाई के पास,मेरे कुणाल का हाथ थामें मैंने गृह प्रवेश किया, अब ज़िंदगी में कोई कमी नहीं आज पूरी हो गई हूँ अपना वजूद कुणाल के अस्तित्व को समर्पित करके,
आज सबकुछ खूबसूरत है।

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विजय विभोर की लघुकथाएँ

१. कुत्ता कुत्ते -------------------------- नन्ही पिंकी को ट्यूशन पर हमेशा दादी जी या मम्मी ही छोड़ने जाती थीं| लेकिन आज दोनों ही घर पर नहीं थीं| ट्यूशन का टाइम हुआ तो पिंकी ने अपना बस्ता उठाया और ट्यूशन के लिए निकल ली| झबरु ने उसे जाता देखा तो दबे पाँव उसके पीछे-पीछे हो लिया| रास्ते में कुछ लालची निगाहों ने देखा कि पिंकी आज अकेली ही चली आ रही है। लेकिन वे नज़रें झबरू को नहीं देख सकी। पिंकी अपनी मस्ती में चल रही थी इसलिए उसको भी पता नहीं चला कि उसके पीछे कौन आ रहा है, कौन नहीं| पिंकी ट्यूशन सैंटर के अंदर पहुँची तो झबरु भी वापिस घर की तरफ हो लिया, क्यूंकि घर पर कोई था नहीं| ट्यूटर ने आज दस मिनिट पहले ही क्लास खत्म कर दी| पिंकी अपने घर की तरफ निकली तो वे भूखी-लालची निगाहें अपनी दो टाँगों के सहारे उसके पीछे लग गयी। जैसे ही उन्होंने गलत इरादे से पिंकी पर हाथ डालने की कोशिश की तभी दूर से भौंकता/दौड़ता हुआ झबरु उन्हें पिंकी की तरफ आता दिखाई पड़ा। अपने प्रति किसी अनहोनी की आशंका से उस वक्त उन्होंने अपनी जान बचाकर भागने में ही भलाई समझी| २. तारों की छाँव ------------------...