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जनकवि/जनलेखक नागार्जुन प्रतियोगिता (2020)

वर्जिन साहित्यपीठ जनकवि/जनलेखक प्रतियोगिता 2020 हेतु कविता/लघुकथा/कहानी/निबंध/लेख आमंत्रित करता है

1. प्रथम पुरस्कार: 3100 रुपये
2. अन्य पुरस्कार: टॉप 10 में पहुँचने वाले अन्य सभी  लेखकों की एक पुस्तक पुरस्कारस्वरूप प्रकाशित की जाएगी। उन्हें 1 लेखकीय प्रति भी प्रदान की जाएगी।

निर्णायक मंडल: गूगल प्ले स्टोर के पाठक
प्रवेश प्रक्रिया: आपको न्यूनतम 21 कविताएँ/लघुकथाएँ अथवा 11 कहानियाँ अथवा 15 लेख/निबंध परिचय और फोटो के साथ virginsahityapeeth@gmail.com पर भेजना है। भेजने से पूर्व अशुद्धियाँ जांच लें और रचनाएँ मंगल/यूनिकोड में ही भेजें। आप एक साथ कई विधाओं में भी रचनाएँ भेज सकते हैं।

प्रवेश शुल्क: 500 रूपए (यदि आप 3 विधाओं में हिस्सा ले रहे हैं तो आपको 500 x 3 = 1500 रूपए भेजने होंगे)। आप एक ही विधा की एक से अधिक पांडुलिपि भी भेज सकते हैं। 

यह राशि आपको 9868429241 पर पेटीएम अथवा गूगल पे करना है। आप राशि बैंक में भी ट्रांसफर कर सकते हैं। ईमेल में रचनाओं के साथ पेटीएम की रसीद अवश्य संलग्न करें।

भाषा/साहित्यिक विधा: किसी भी भाषा में, किसी भी साहित्यिक विधा में आप भाग ले सकते हैं।

चयन प्रक्रिया: निष्पक्षता का ध्यान रखते हुए इस प्रतियोगिता के तहत आपकी रचनाओं को पुस्तक (ईबुक) का रूप देकर गूगल प्ले स्टोर पर प्रकाशित किया जाएगा। पुस्तक निःशुल्क रखी जाएगी ताकि अधिकतर पाठक उसे पढ़ें। 

गूगल प्ले स्टोर के बुक सेक्शन में टॉप चार्ट में आपकी पुस्तक टॉप 10 में पहुँचने पर पुरस्कार की अधिकारी हो जाएगी। प्रथम के अतिरिक्त टॉप 10 में पहुँचने वाली सभी पुस्तकों को सांत्वना पुरस्कार के रूप में उनकी कोई एक पुस्तक साहित्यपीठ द्वारा प्रकाशित की जाएगी।

अंतिम तिथि: रचनाएँ भेजने की अंतिम तिथि 31 अगस्त, 2020 है।

निर्णय: 15 सितम्बर 2020 को पुस्तकें प्रकाशित कर दी जाएँगी और 16 अक्टूबर को टॉप चार्ट के अनुसार पुरस्कारों की घोषणा कर दी जाएगी।

अधिक जानकारी हेतु सम्पर्क कीजिए:
वर्जिन साहित्यपीठ
9971275250

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विजय विभोर की लघुकथाएँ

१. कुत्ता कुत्ते -------------------------- नन्ही पिंकी को ट्यूशन पर हमेशा दादी जी या मम्मी ही छोड़ने जाती थीं| लेकिन आज दोनों ही घर पर नहीं थीं| ट्यूशन का टाइम हुआ तो पिंकी ने अपना बस्ता उठाया और ट्यूशन के लिए निकल ली| झबरु ने उसे जाता देखा तो दबे पाँव उसके पीछे-पीछे हो लिया| रास्ते में कुछ लालची निगाहों ने देखा कि पिंकी आज अकेली ही चली आ रही है। लेकिन वे नज़रें झबरू को नहीं देख सकी। पिंकी अपनी मस्ती में चल रही थी इसलिए उसको भी पता नहीं चला कि उसके पीछे कौन आ रहा है, कौन नहीं| पिंकी ट्यूशन सैंटर के अंदर पहुँची तो झबरु भी वापिस घर की तरफ हो लिया, क्यूंकि घर पर कोई था नहीं| ट्यूटर ने आज दस मिनिट पहले ही क्लास खत्म कर दी| पिंकी अपने घर की तरफ निकली तो वे भूखी-लालची निगाहें अपनी दो टाँगों के सहारे उसके पीछे लग गयी। जैसे ही उन्होंने गलत इरादे से पिंकी पर हाथ डालने की कोशिश की तभी दूर से भौंकता/दौड़ता हुआ झबरु उन्हें पिंकी की तरफ आता दिखाई पड़ा। अपने प्रति किसी अनहोनी की आशंका से उस वक्त उन्होंने अपनी जान बचाकर भागने में ही भलाई समझी| २. तारों की छाँव ------------------...