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लघुकथा मंजूषा - 5 हेतु लघुकथाएं आमंत्रित हैं।



(पुस्तक पेपरबैक और ईबुक, दोनों रूपों में प्रकाशित की जाएगी।)

रॉयल्टी: 50% लेखकगण + 30% संपादन मंडल + 20% साहित्यपीठ (पहली 10 प्रति की बिक्री साहित्यपीठ के पास रहेगी)। रॉयल्टी 11वीं प्रति की बिक्री से प्रारंभ होगी।

सेल रिपोर्ट: पारदर्शिता हेतु गूगल, पोथी और अमेज़न की सेल रिपोर्ट यहीं वर्जिन साहित्यपीठ के फेसबुक पेज और ग्रुप तथा ब्लॉग पर प्रति माह के प्रथम सप्ताह में शेयर की जाएगी।

नमस्कार मित्रों। सार्थक लेखन हेतु सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।

निमंत्रण: लघुकथा मंजूषा  - 1, 2, 3 एवं 4 की सफलता के पश्चात वर्जिन साहित्यपीठ लघुकथाकारों  से लघुकथा मंजूषा - 5 हेतु लघुकथाएं आमंत्रित करता है। आप अपनी प्रकाशित/अप्रकाशित 2 बेहतरीन लघुकथाएं virginsahityapeeth@gmail.com पर भेज दें।  सब्जेक्ट में "लघुकथा मंजूषा - 5, 2020 हेतु" अवश्य लिखें।

संपादक के लिए: जो संपादक मित्र इस संकलन से जुड़ना चाहते हैं वे अंत में दिए 9971275250 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

प्लेटफॉर्म: ईबुक अमेज़न, गूगल प्ले स्टोर, और गूगल बुक्स के साथ सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी में उपलब्ध होगी जबकि पेपरबैक पोथी की वेबसाइट से ऑर्डर कर सकेंगे अथवा हमसे मँगवा सकेंगे।

समय सीमा: लघुकथाएं भेजने की अंतिम तिथि है - 25 मई, 2020।  5 जून तक चयनित लघुकथाकारों की सूची प्रकाशित कर दी जाएगी और 20 जून, 2020 तक संकलन प्रकाशित कर दिया जाएगा।

पाण्डुलिपि भेजने से पूर्व निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर अवश्य ध्यान दें:

1. लघुकथाएं मंगल/यूनिकोड फॉण्ट में भेजें

2. साथ में फोटो और संक्षिप्त परिचय भी अवश्य भेजें

5. भेजने से पूर्व अशुद्धि अवश्य जाँच लें। अधिक अशुद्धियाँ होने पर रचना अस्वीकृत की जा सकती है।

5. ईमेल में इसकी उद्घोषणा करें कि उनकी रचना मौलिक है और किसी भी तरह के कॉपीराइट विवाद के लिए वे जिम्मेवार होंगे।

सूची: चयनित लघुकथाकारों की सूची और अन्य सभी अपडेट साहित्यपीठ के फेसबुक ग्रुप और पेज तथा ब्लॉग पर जारी की जाएगी। अतः फेसबुक पेज और ब्लॉग को फॉलो करें और ग्रुप जॉइन करें।

किसी भी तरह की जिज्ञासा अथवा शंका समाधान हेतु 9971275250 पर सम्पर्क करें।

धन्यवाद

वर्जिन साहित्यपीठ
9971275250

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१. कुत्ता कुत्ते -------------------------- नन्ही पिंकी को ट्यूशन पर हमेशा दादी जी या मम्मी ही छोड़ने जाती थीं| लेकिन आज दोनों ही घर पर नहीं थीं| ट्यूशन का टाइम हुआ तो पिंकी ने अपना बस्ता उठाया और ट्यूशन के लिए निकल ली| झबरु ने उसे जाता देखा तो दबे पाँव उसके पीछे-पीछे हो लिया| रास्ते में कुछ लालची निगाहों ने देखा कि पिंकी आज अकेली ही चली आ रही है। लेकिन वे नज़रें झबरू को नहीं देख सकी। पिंकी अपनी मस्ती में चल रही थी इसलिए उसको भी पता नहीं चला कि उसके पीछे कौन आ रहा है, कौन नहीं| पिंकी ट्यूशन सैंटर के अंदर पहुँची तो झबरु भी वापिस घर की तरफ हो लिया, क्यूंकि घर पर कोई था नहीं| ट्यूटर ने आज दस मिनिट पहले ही क्लास खत्म कर दी| पिंकी अपने घर की तरफ निकली तो वे भूखी-लालची निगाहें अपनी दो टाँगों के सहारे उसके पीछे लग गयी। जैसे ही उन्होंने गलत इरादे से पिंकी पर हाथ डालने की कोशिश की तभी दूर से भौंकता/दौड़ता हुआ झबरु उन्हें पिंकी की तरफ आता दिखाई पड़ा। अपने प्रति किसी अनहोनी की आशंका से उस वक्त उन्होंने अपनी जान बचाकर भागने में ही भलाई समझी| २. तारों की छाँव ------------------...