...मधु फोन पर किशोर से बात करती रही वह भूल चुकी थी किवह आँचलपुर में किशोर के घर आई हुई है,समय इतनी तेजी से दौड़ता है मानो किसी से स्पर्द्धा हो,और सच तो बात यह है कि जहाँ प्रेम की चर्चा होती है वहाँ समय क्या कई शताब्दियों का समय भी कम है प्रेम की चर्चा करने में।यही स्तिथि हो गई थी मधु की,वह फोन पर बात करती जारही थी हर प्रश्न और उनके उत्तर स्वतःदोनो के ओर से बेरोक टोक आदान प्रदान होरहे थे,अतः कब समय गुजरा पता ही नही चला। दीदी घर नही चलोगी।चन्द्रा बोली। चलेंगे जरा थोड़ी देर बात कर लेने दे।मधु ने चन्द्रा को जबाब दिया। क्या कह रही हो।दूसरी ओर से किशोर ने उससे पूछा। जी...वह चन्द्रा साथ है उसे बोला था मैंने।मधु बोली। चन्द्रा ड्राईंग रूम से वाहर आचुकी थी माजी के कहने पर मानिसि और चन्द्रा दोनो घरेलू काम मे ब्यस्त होगई आज वैसे भी दीपावली का त्यौहार मनाया जा रहा था चारो ओर खुशियों का वातावरण था।धीरे धीरे दिन छुप गया ,मांजी ने आकर ड्रायगरूम की लाइट आन की मधु ने झिझकते हुए फोन आहिस्ता से रख दिया। ओ माई गॉड....।इतना समय बीत गया।मधु के मुहँ से स्वता निकला। कोई बात नही बेटी।चलो अब फ्रेस हो ल...